Saturday, 27 March 2021

बाली वध।

एक भाई मुझे इनबाक्स मे कह रहे हैं कि तुमने राम-बालि प्रसंग पर बहुत पोस्ट लिखे!
तुमने कहा कि राम का यह तर्क सही नही था, वह तर्क सही नही था, तो अब तुम्ही बता दो कि राम और बालि युद्ध मे हुआ क्या था?

अब मै आपसे कहना चाहूँगा कि भाईसाहब आपका सवाल मुझे बुरा नही लगा, दूसरी बात उस समय तो मै था नही जो सच बता दूँ कि क्या हुआ था? 
पर जहाँ तक मैने अध्ययन किया है उसके अनुसार मै यह दावे से कह सकता हूँ कि राम ने बालि को पीछे से नही बल्कि योद्धाओं की तरह युद्ध करके सामने से उसके सीने मे तीर मारा था!
इसके कुछ तर्क और प्रमाण भी मै दे सकता हूँ...

सबसे पहली बात तो बालि के पास ऐसी कोई शक्ति थी ही नही कि वो अपने शत्रु की आधी ताकत खींच ले! रामायण मे साफ लिखा है कि बालि को सामने आने वाले योद्धा की आधी ताकत क्षीण हो जाती थी! यह इस बात का प्रतीक है कि बालि लम्बा-चौड़ा और कद-काठी वाला योद्धा था!
दूसरी बात यदि राम के हाथों बालि को पीछे से छुपकर मरवाना था तो सुग्रीव और जामवन्त ने राम की शक्ति का परीक्षण क्यों किया?
सुग्रीव ने साफ ही कहा है कि मै कैसे मान लूँ कि आप बालि को युद्ध मे मार गिराओगे। क्यों राम से सात पेड़ो को एक बाण से कटवाया गया?
आखिर पीछे से तो कोई भी छुपकर मार सकता था..
तीसरी बात जब लंका मे राम और रावण का युद्ध चल रहा था तब रावण राम को शर्मिंदा करने के लिये कहता है कि अरे वो वन-वन भटकते वनवासी तू क्या त्रिलोक-विजयी रावण से युद्ध करेगा! रावण ऐसे ही कही ताने राम को मारता है, पर उसने भी एक बार यह नही कहा कि तुमने बालि को पीछे से मारकर अपने कुल को कलंकित कर दिया!
अगर राम ने ऐसा किया होता तो रावण जरूर यह ताना भी मारता।

चौथी बात जब मेघनाद और लक्ष्मण का युद्ध चल रहा था, तब मेघनाद ने मायावी युद्ध करना प्रारम्भ कर दिया!
इससे क्रोधित होकर लक्ष्मण राम के पास आये और बोले कि हे भइया! वह धूर्त मायावी युद्ध कर रहा है, अतः आप मुझे ब्रह्मास्त्र चलाने की अनुमति दो!
राम ने कहा कि हे लक्ष्मण! ब्रह्मास्त्र जैसे विध्वंसक अस्त्र का प्रयोग कभी यूँ ही नही करना चाहिये, यह अधर्म होगा।
लक्ष्मण बोले कि भइया ये असुर कोई युद्धनीति नही मानते, ये खुद अधर्म करते हैं।
राम ने कहा कि वो चाहे जो करें, पर हमे अनैतिक तरीके से युद्ध नही करना चाहिये।
ऐसा कहकर राम ने लक्ष्मण को ब्रह्मास्त्र चलाने से मना कर दिया! इस बात से साफ पता चलता है कि राम युद्ध मे भी छल-कपट या अनैतिकता का मार्ग नही अपनाते थे! फिर भला वही राम छलपूर्वक बालि को क्यों मारेंगे।

पाँचवीं बात रामायण और रामचरित मानस मे बालि को किष्किंधा का राजा बताया गया है, पर पढ़ने के बाद तो ऐसा लगता है कि पूरे किष्किंधा मे बालि अकेला ही रहता था! न तो उसकी कोई प्रजा थी, और न ही मंत्री तथा सेना!
अब यदि राम ने उसे पीछे से छलपूर्वक मारा तो फिर उसकी सेना या प्रजा ने इसका विरोध क्यों नही किया?
सुग्रीव और राम के खिलाफ किष्किंधा की प्रजा ने विद्रोह क्यों नही किया?

खैर मैने ऊपर जितनी बातें कही ये सब तर्क थे, और लोग तर्क को नही लिखित प्रमाण को मानते है, अतः अब मै ऐसा प्रमाण देता हूँ जो आसानी से झुठलाया नही जा सकता।
वाल्मीकि रामायण (गीताप्रेस) किष्किंधाकाण्ड, सर्ग-19 श्वोक-11-12 मे साफ लिखा है कि जब युद्ध मे राम ने बालि को मार गिराया तो उसकी सेना भाग खड़ी हुई। भागते हुये बन्दरों को रास्ते मे बालि की पत्नि तारा मिली, और बन्दरों से बोली कि यदि राज्य के लोभी उस सुग्रीव ने राम के हाथों अपने ही भाई को मरवा दिया है, तो तुम लोग भाग क्यों रहे हो?

तब बालि के सैनिक वानरों ने कहा कि हे देवी! तुम्हारा पुत्र (अंगद) अभी जीवित है, तुम लौट चलो और अंगद की रक्षा करो! राम के रूप मे स्वयं यमराज आ गये हैं जो बालि को मारकर अपने साथ ले जा रहे हैं।

अगले श्वोक मे वही वानर तारा से कहते हैं कि- "बालि के चलाये हुये वृक्षों और बड़ी-बड़ी शिलाओं को अपने वज्रतुल्य बाणों से विदीर्ण करके राम ने बालि को मार गिराया है"

इस श्वोक मे वानर साफ कहते हैं कि बालि ने राम के ऊपर पेड़ उखाड़कर फेंके, और बड़े-बड़े पत्थरों को भी उनके ऊपर फेंका! पर राम ने अपने बाणों से पेड़ों और पत्थरों को विदीर्ण करके बालि को मार दिया।

अब सवाल यह है कि यदि राम बहेलिये की तरह छुपे थे, तो बालि उन पर पेड़ और पत्थर कैसे फेंक रहा था।

प्रतीक तो ऐसा हो रहा है कि पहले बालि और सुग्रीव का युद्ध हुआ, और जब सुग्रीव परास्त हुये तो राम ने बीच मे आकर बालि से युद्ध किया। बालि ने कहा भी है की युद्ध मेरा और सुग्रीव का था, तो तुम बीच मे क्यों आये?
युद्ध मे जब बालि अस्त्र-शस्त्रहीन हो गया तब उसने राम पर पेड़ और पत्थर फेंके! और अन्ततः राम ने अपने नुकीले तीर उसके सीने मे उतार दिये।

वस्तुतः रामायण मे मिलावट का एक दौर चला! आज भी विद्वान कहते हैं कि रामायण मे हजारों श्लोक मिलावटी है! यहाँ तक की पूरा का पूरा उत्तरकाण्ड मिलावटी ही है!
मिलावट करने वालों ने काफी श्लोकों को हटाया, पर कुछ श्वोकों को हटाने से वो चूक गये।

मिलावत केवल राम के साथ ही नही, कृष्ण के साथ भी हुई है। मै नरसिंहपुराण और विष्णुपुराण से एक नही दर्जनों सबूत दे सकता हूँ कि श्रीकृष्ण ने कभी रासलीला की ही नही! पूरा का पूरा रासलीला प्रकरण ही मिलावट है..
पर यह मेरा नही, धर्म के ठेकेदारों का काम है।

वैसे यह मेरे अध्ययन का अनुभव है, मानना या न मानना आप सबकी इच्छा, पर तर्क और प्रमाण तो यही कह रहे हैं कि राम ने बालि को छुपकर नही मारा था।

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रामायण के किष्किंधाकाण्ड मे घटित राम-बालि प्रसंग मैने कई बार पढ़ा है, पर इसे जितनी बार पढ़ो रोचकता और जिज्ञासा उतनी ही बढ़ती जाती है!
कुछ बातें अभी भी इस घटनाक्रम मे ऐसी है जिसे चाहे जितना दिमाग लगाओ समझना मुश्किल ही है!

जैसे कि सबको पता है कि राम ने बालि को छुपकर मारा था, पर जब राम ने सुग्रीव से बालि को मारने का वादा किया तब सुग्रीव ने कहा कि मै कैसे मान लूँ कि आप बालि को युद्ध मे हरा दोगे?
फिर राम ने एक ही बाण से सात पेड़ो को काटकर सुग्रीव को विश्वास दिलाया कि मै बालि को मार सकता हूँ!
अब यदि राम के हाथों बालि को छुपकर ही मरवाना था तो सुग्रीव राम का शक्ति-परिक्षण क्यों कर रहे थे?
छुपकर तो कोई भी मार सकता था...

यह एक गूढ़ सवाल है, जिस पर शोध होना चाहिये, क्योंकि राम सदैव युद्ध मे भी धर्म-परायण ही थे, फिर ऐसा अधर्म चौकाने वाला है।

दूसरी बात जब राम ने बालि को छुपकर मारा तो अपने कृत्य को धर्मयुक्त साबित करने के लिये उन्होने बालि के समक्ष दो तर्क दिये!
पहले तर्क मे कहा कि हे बालि! तुमने अपनी अनुज-वधू रूमा का उपभोग किया है, इसलिये मैने तुम्हारा वध किया।
दूसरे तर्क मे कहा कि हे बालि! तुम एक जानवर (बन्दर) हो, अतः तुम्हे छुपकर मारना अधर्म नही है!

अब राम द्वारा दिये गये उपरोक्त दोनो तर्क एक दूसरे के विरोधाभासी है!
यदि पहले तर्क के अनुसार बालि ने सुग्रीव की पत्नि का उपभोग किया इसलिये मारा तो उन्हे सामने से वीरों की तरह ललकार कर मारना चाहिये था! और यदि दूसरे तर्क के अनुसार बालि जानवर था तो सुग्रीव की पत्नि का उपभोग करना अधर्म कैसे हो गया?
जानवर प्रजनन-क्रिया मे रिश्ते-नाते कहाँ निभाते हैं?
कुत्ता-बिल्ली आदि सभी जानवर अपनी सगी माँ और सगी बहन के साथ भी प्रजनन करते हैं! यही नही हिन्दूधर्म मे पूज्यनीय गाय-बछड़े भी अपनी माँ और बहन से प्रजनन करते ही है!
उनके लिये यह सब अधर्म नही है, क्योंकि वो जानवर हैं, फिर भला बालि के लिये अधर्म कैसे हो गया?
यदि बालि ऐसा करता था तो दूसरे बन्दर आज भी ऐसा ही करते हैं.... फिर तो राम को बन्दर, बैल, कुत्ते और शेर समेत सभी जानवरों को मार देना चाहिये, क्योंकि ये सब अपनी माँ-बहन आदि से प्रजनन करते हैं! और अगर ये सब निरापराध हैं तो बालि अकेले अपराधी कैसे हो गया?

राम के तर्क वाकई बड़े कमजोर थे, निश्चित ही इसमे कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है।


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यह तो लगभग सबने पढ़ा ही होगा कि वानरराज बालि के पास एक ऐसी माला थी जिसे पहनने से वह अपने शत्रु का आधा बल खींच लेता था, और उसी से वो अपराजेय हो गया था! यही वजह थी कि राम ने बालि को पेड़ के पीछे से छुपकर मारा था!

मै सोचता हूँ कि आखिर बालि के माले मे ऐसा कौन सा चुम्बक लगा था जिससे वह सामने वाले की आधी शक्ति खीच लेता था?
यह वाकई हास्यास्पद और कुतर्क वाली बात है!
बाल्मीकि रामायण किष्किंधाकाण्ड सर्ग-11 मे बाल्मीकि जी ने लिखा है कि जो शत्रु बालि से युद्ध करने जाता था, बालि के सामने आते ही उसकी आधी शक्ति क्षीण हो जाती थी, पर कहीं ऐसा नही लिखा है कि बालि उसकी शक्ति को खींच लेता था!

वास्तव मे बालि कद-काठी से बहुत हट्टा-कट्टा था! वह अत्यन्त बलवान और गठीले बदन का मालिक था! यह साधारण सी बात है कि यदि कोई अपने से दोगुने लम्बे-चौड़े योद्धा से युद्ध करे तो उसे देखते ही उसकी आधी शक्ति जैसे क्षीण हो जाती है! इसमे खीचने जैसी कोई बात नही थी, बल्कि जो योद्धा बालि से युद्ध करने जाता था, वह बालि के गठीले और ऊँचे शरीर को देखकर ही ऐसा अनुभव करता था कि जैसे उसकी आधी शक्ति क्षीण हो गयी है!
बालि वास्तव मे कितना बलिष्ठ था उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वयं हनुमान और जामवंत भी उससे लड़कर सुग्रीव का राज्य वापस दिलाने मे नाकाम थे! इसीलिए तो इन लोगों ने राम के हाथों धोखे से बालि का वध करवाया!

वैसे राम ने जिस तरह बालि को मारा वह भी किसी घृणित कृत्य से कम नही था!
राम ने केवल सुग्रीव की बात सुनकर बालि को मारने की प्रतिज्ञा कर ली! जबकि धर्मानुसार राम को एक बार बालि से भी बात करनी चाहिये थी, और उसका भी पक्ष सुनना चाहिये था! यही नही राम को प्रयास करना चाहिये था कि दोनो भाइयों मे समझौता करवा देते, सम्भव है कि बालि राम की बात मान जाता!

दूसरी बात जब राम ने बालि को पेड़ के पीछे से छुपकर मारा, तब बालि ने राम को धिक्कारते हुये कहा कि तुम कायर थे, अगर क्षत्रिय थे तो मुझे सामने से युद्ध मे हराते!
तब राम ने जवाब दिया कि- "हे बालि! मै क्षत्रिय हूँ, और धर्मज्ञ राजा भी मृगया (शिकार) मे विभिन्न जानवरों का वध करते थे!
हे बालि! तुम भी शाखामृग (बन्दर) हो, और मैने क्षत्रियों की भांति तुम्हारा शिकार किया है! शिकार चाहे सामने से करें या पीछे से छुपकर...  उसमे निन्दा नही, अतः तुम्हारा वध अधर्म नही है"

ये संस्कार थे भगवान श्रीराम के, एक सूरवीर राजा को पहले छुपकर तीर मार दिया और बाद मे सफाई दे दिया कि मैने तो तुम्हारा शिकार किया है!
वाह्ह प्रभु श्रीराम! क्या तर्क दिया आपने, धन्य हो आप।
जिसे मारना था, उसे जानवर घोषित कर दिया और जिस सुग्रीव से आपको काम था उसे सीने से लगाये रखा।

वैसे प्रमाण मांगने वालों को बता दूँ कि उक्त कथा वाल्मीकि रामायण किष्किंधाकाण्ड सर्ग-18 श्लोक-39-42 मे वर्णित है!

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