गणेश जी को आमतौर पर तार्किक लोग काल्पनिक ही मानते हैं, ऊपर से पुराणों मे गणेश के बारे मे जितनी कथाऐं लिखी हैं, वे इस बात की और भी पुष्टि कर देती हैं कि गणेश एक काल्पनिक चित्रण के अलावा और कुछ नही हैं!
मै व्यक्तिगत-रूप से गणेश की शारीरिक बनावट का मजाक बना रहा हूँ, पर पुराणों मे जिस तरह से उन्हे दर्शाया गया है, वह तो सच मे हास्यास्पद ही है।
गणेण जी का वर्तमान स्वरूप (गजमुख) कैसे हुआ, इस पर पुराणों मे अलग-अलग कथाऐं लिखी है, जो तार्किक और वैज्ञानिकी-दृष्टि से बिल्कुल परे हैं।
सबसे पहली कथा शिवपुराण रुद्रसंहिता चतुर्थखण्ड अध्याय-3 (चित्र1-5) मे लिखी है। कथानुसार एक बार जब पार्वती स्नान कर रही थी तो उन्होने एक पुत्र की कामना करके अपने शरीर के मैल से एक चेतन पुरुष का निर्माण किया और उसे अपनी पहरेदारी के लिये गुफा के मुहाने पर खड़ा कर दिया।
थोड़े समय बाद जब शिवजी कहीं से घूमकर वापस आये और गुफा मे जाने लगे तो दरवाजे पर खड़े बालक ने उन्हे रोक दिया। इसके बाद शिव और गणेश मे भयंकर युद्ध हुआ, तथा क्रोध मे आकर शिव ने गणेश का सिर काट दिया।
जब पार्वती को अपने पुत्र के सिर कटने की घटना पता चली तो उन्होने क्रोध मे आकर सृष्टि के विनाश करने का निर्णय लिया, और फिर पार्वती को शान्त करने के लिये शिवजी ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया.... और इस तरह से गणेश का वर्तमान-रूप सामने आया।
गणेश से जुड़ी दूसरी कथा वराहपुराण अध्याय-23 (चित्र-6-8) मे आती है--
एक बार ब्रह्मा समेत समस्त देवता किसी विषय पर सलाह लेने के लिये शिव के पास आये! उन देवताओं की किसी बात पर शिव को हंसी आ गयी और उनकी हंसी से एक मनोहर बालक का जन्म हो गया! वह बालक इतना सुन्दर था कि उस बालक की सुन्दरता देखकर पार्वती उस पर मोहित हो गयी, और एकटक उसे निहारने लगी!
शिव को लगा कि मुझसे ही जन्मा बालक इतना आकर्षक है कि मेरी पत्नि उस पर मोहित हो गयी है! शिव ने सोचा "स्त्री स्वाभाव चंचल होता ही है, और मेरी पत्नि भी लोकलाज त्याग कर इस पर मुग्ध हो गयी है"
बस... शिव को बड़ा क्रोध आया और उन्होने उस बालक को श्राप दिया कि- "हे कुमार! तुम्हारा मुख हाथी के मुख जैसा हो जाये और पेट भी लम्बा हो जाये"
शिव के श्राप से बालक गजमुख हो गया, और बाद मे यही बालक गणेश हुये।
गणेश से जुड़ी तीसरी कथा ब्रह्मवैवर्तपुराण गणपतिखण्ड-12 (चित्र-9-11) मे आती है, जो निम्न है-
एक बार शनिदेव की पत्नि ने उन्हे अपने साथ सहवास करने के लिये कहा, पर शनिदेव ने उसकी इच्छापूर्ति न की, अतः उनकी पत्नि ने उन्हे श्राप दिया कि "आज के बाद तुम जिसकी तरफ भी देखोगे, वह जलकर भस्म हो जायेगा"
इसी श्राप के दुःख से द्रवित होकर शनिदेव कैलास पर आये! कैलास पर पार्वती अपने पुत्र गणेश को गोद मे लेकर लाड-प्यार कर रही थी! पार्वती ने जब शनिदेव को उदास देखा तो उनसे उदासी का कारण पूँछा। शनिदेव ने सारी कथा पार्वती को बता दी और कहा कि हे माते! इसी श्राप के कारण मुझे अन्य देवता अक्सर बहुत चिढ़ाते हैं कि तुम्हारी नजर जहाँ पड़ती है, वहाँ सब अमंगल ही होता है! पार्वती ने शनिदेव का विषाद सुना और उनसे कहा कि ऐसा कुछ नही होगा, हे शनैश्चर! आप मेरी (पार्वती) और मेरे पुत्र गणेश की तरफ देखो!
पार्वती के कहने पर शनिदेव ने जैसे ही गणेश को देखा, उनकी तीक्ष्ण नजरों से गणेश का सिर कटकर गोलोक (कृष्ण का धाम) मे जा गिरा, और धड़ लहुलुहान होकर वहीं तड़पने लगा! यह देखकर पार्वती सीना पीटकर रोने लगी।
तब विष्णु ने सोचा कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाये अतः वे गरुण पर सवार होकर एक वन मे गये और आनन-फानन मे एक हथिनी के बच्चे का सिर सुदर्शन से काट लाये तथा उसी सिर को गणेश के धड़ से जोड़ दिया, और उन्हे जीवित कर दिया।
गणेश की चौथी कथा पद्मपुराण सृष्टिखण्ड अध्याय-34 (चित्र-12-13) मे लिखी है-
इस कथा के अनुसार एक बार पार्वती ने अपने शरीर मे लगे उबटन से एक पुरुष की आकृति बनायी और उसका मुँह हाथी के मुख के समान ही बनाया। बाद मे पार्वती ने इस बालक को पुत्र कहकर पुकारा, और यही बालक आगे चलकर सब देवों के पूज्य गणेश हुये।
गणेश की पांचवी कथा श्रीलिंङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय-105 (चित्र-14-16) मे लिखी है।
इस पुराण की कथा के अनुसार देवगण दानवों के त्रास से भयभीत होकर शिव के पास गये, और कहा कि हे प्रभु आप हमारा कल्याण करो, और दानवों से हमे भयमुक्त करो।
देवों की प्रार्थना पर स्वयं शिव ही गजमुख-रूप मे प्रकट हो गये, और बोले कि हम इसी स्वरूप मे असुरों का वध कर तुम्हारी रक्षा करेंगे।
फिर देवों ने उनकी स्तुति की और अपने धाम को चले गये!थोड़े दिनों बाद स्वयं शिव ही पार्वती के गर्भ से गजमुख-रूप मे अपने शस्त्रों के साथ पैदा हुये।
अब मैने आप लोगों को गणेश से सम्बन्धित पांच पुराणों से पांच अलग-अलग कथाऐं बतायी!
......शिवपुराण जहाँ कहता हैं कि शिव ने बालक का सिर काटकर उसे हाथी का सिर चिपका दिया!
......वाराहपुराण कहता है कि शिव ने सिर काटा नही बल्कि श्राप देकर गजमुख कर दिया!
......ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार शनिदेव के दृष्टिपात से सिर कट गया और विष्णु ने हाथी का सिर जोड़ दिया!
......पद्मपुराण के अनुसार पार्वती ने हाथी के मुख जैसा ही पुत्र बनाया था।
......और लिङ्गमहापुराण के अनुसार स्वयं शिव ही हाथी के जैसे मुख वाले रूप मे पार्वती के गर्भ से शस्त्रों के साथ जन्मे!
इन कथाओं का निष्कर्ष यही निकलता है कि गणेश सचमुच पौराणिकों की कल्पना है, और आज विज्ञान के दौर मे ऐसी बातों पर यकीन करना किसी बेवकूफी से कम नही है।
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