Saturday, 27 March 2021

ईसाइयत।

जीसस के बारे मे पादरी गैंग दो बातें बहुत प्रचारित करती हैं-
--पहली की वे ईश्वर के पुत्र थे!
--दूसरी की वे बहुत दयालु थे!

सबसे पहले हम पहली बात पर नजर डालते हैं। जैसा कि बाइबल मैथ्यू-3/17 मे लिखा है कि बाइबल के परमेश्वर (यहोवा) ने स्वयं आकाशवाणी करके कहा कि "यह (जीसस) मेरा पुत्र हैं, और मै इससे अत्यन्त प्रसन्न हूँ"
अब सवाल यह है कि परमेश्वर तो सर्व-शक्तिमान और समर्थवान होता है! यदि उसे चमत्कृत ढ़ंग से एक पुत्र पैदा ही करना था तो कुंवारी मरियम के गर्भ पैदा करने के बजाये किसी पुरुष के पेट से पैदा कर देता। इससे और भी बड़ा चमत्कार होता, और लोग मरियम पर संदेह की दृष्टि भी न डालते। अब एक कुंवारी लड़की के गर्भ से पैदा करने से हानि यह हुई कि लोगों को यह "चमत्कार कम, व्यभिचार अधिक" लगता है।
आखिर जो परमेश्वर पलक झपकते ही पूरा ब्रह्माण्ड बना सकता है, उसे एक पुत्र पैदा करने के लिये किसी महिला का सहारा क्यों लेना पड़ा?

जीसस का खुद को ईशपुत्र बताना ही उनकी मौत का भी सबसे बड़ा कारण था! आज ही नही, उस दौर मे भी लोग उन्हे ईशपुत्र नही मानते थे।
वैसे जीसस सम्भवतः जिसके पुत्र हो सकते थे, मै उसका नाम तो नही लिखूँगा, पर बाइबल को पढ़ने वाला हर इंसान इसका अंदाजा लगा सकता है। New testament (Luke) मे भी जीसस के गुमनाम पिता की तरफ ईशारा किया गया है! कुरान-3/37 मे भी इसके संकेत मिलते हैं, और तो और हदीस मे साफ लिखा है कि किस इंसान को मरियम के साथ सम्बन्ध बनाने के अपराध मे यहूदियों ने मार डाला था।
इस सबके बावजूद भी जीसस खुद को ईश्वर का पुत्र ही घोषित करते रहे। यही बात यहूदियों को बहुत नागवर लगती थी।
जब येरुसलम के गर्वनर पोण्टियास पॉलेट (पिलातुस) ने यहूदियों से कहा कि इसका (जीसस) अपराध इतना भी बड़ा नही है कि इसे मृत्युदंड दिया जाये, तब यहूदियों ने पिलातुस से कहा-
"हमारी भी एक व्यवस्था है और उस व्यवस्था के अनुसार वह मारे जाने योग्य है, क्योंकि उसने अपने-आपको परमेश्वर का पुत्र बताया है।"
                                       (यूहन्ना-19/7 चित्र-1)
अब आश्चर्य की बात है कि जिस बात को दो हजार साल पहले जीसस के समकालीन यहूदियों ने मानने से इनकार कर दिया था, धूर्त पादरी वही बात आज विज्ञान के युग मे भी हमे मनवाने का प्रयास करते हैं।

अब आते हैं पादरियों की दूसरी कहानी कि जीसस बड़े दयालु थे, तो इसी बाइबल मे जीसस ने अपने चेलों से कहा है कि "तुम अपने कपड़े बेचकर तलवार खरीद लो"
अब जाहिर सी बात है कि जीसस तलवार सब्जी काटने के लिये तो खरीदवा नही रहे थे।

पादरी कहते हैं कि जीसस इतने दयालु थे कि जिन लोगों ने उन्हे क्रॉस पर लटकाया, उनके लिये भी वह ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे।
असल मे बाइबल Luke-23/34 मे लिखा है कि "यीशु ने कहा, हे पिता! इन्हे क्षमा कर, क्योंकि ये नही जानते कि ये क्या कर रहे हैं"
इस वचन का भरपूर प्रचार करके पादरी कहते हैं कि जीसस कितने बड़े दयावान थे! लेकिन इसी बाइबल (ल्यूक-19/27 चित्र-2) मे जीसस ने कहा है "परन्तु मेरे उन दुश्मनों को जो नही चाहते थे कि मै उन पर राज करूँ, उनको यहाँ लाकर मेरे सामने मार डालो।"

जीसस की दयालुता का पता इससे भी चलता है कि वे यह तो कहते ही थे कि मै केवल यहूदियों के मार्गदर्शन के लिये आया हूँ, साथ ही गैर यहूदियों को "कुत्ता" भी कहकर सम्बोधित करते थे।
बाइबल (मैथ्यू-15/23-27 चित्र-3) की कथानुसार एक बार एक सामरी (गैर-यहूदी) महिला मे जीसस से अपनी पुत्री के लिये प्रार्थना करने को कहा!
पहले तो जीसस ने अनसुना कर दिया, लेकिन जब उनके चेलों ने निवेदन किया तब जीसस ने कहा कि "लड़को (यहूदियों) की रोटी लेकर कुत्तों (गैर-यहूदियों) के आगे डालना उचित नही"
यह सुनकर वह सामरी महिला जीसस के पैरों मे गिरकर बोली "हे प्रभु! कुत्ते भी तो मालिक का वही चूरचार खाते हैं जो उनके स्वामियों की मेज पर से गिरते हैं।"
इतना गिड़गिड़ाने के बाद तब कहीं जाकर दयालु ईशपुत्र को दया आयी।
वास्तव मे आज भारत मे भी जो लोग ईसाई बनकर बहुत जीसस-जीसस का जाप कर रहे हैं, जीसस की नजरों मे उनकी भी वही इज्जत है जो उस सामरी महिला की थी।

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कल 'श्रीमान परमेश्वर के एकलौते बेटे जीसस' का जन्मदिन है! इतने दिनों मे परमेश्वर ने ले-देकर एक बेटा भी पैदा किया तो उसे भी विधर्मियों के हाथों मरने के लिये छोड़ दिया था।
वैसे जो ईसाई जीसस को परमेश्वर के पुत्र होने का दावा करते हैं, वे कभी यह नही बताते कि परमेश्वर ने अपने पुत्र की रक्षा आखिर क्यों नही की?
क्या जीसस 'नालायक पुत्र' थे?

आमतौर पर ईसाई कहते हैं कि जीसस हम मानवों के लिये क्रास पर चढ़ गये, पर यह भी सरासर झूठ है।
बाइबल (मैथ्यू-27/46-50, चित्र-1) मे लिखा है कि जब जीसस को क्रास पर लटकाया गया, तब वे अपने पिता (यहोवा) से कह रहे थे कि आपने मुझे क्यों छोड़ दिया। अर्थात जीसस अपने प्रभु से अपनी जान बचाने के लिये प्रार्थना कर रहे थे और बाद मे जोर से चिल्लाकर उन्होने अपने प्राण त्याग दिये।
मतलब साफ था कि जीसस मृत्यु से बहुत डरते थे! अगर इनकी तुलना एक बार नास्तिक सरदार भगतसिंह से करें तो भगतसिंह ने खुशी-खुशी फांसी के फंदे के चूमकर मौत को गले लगा लिया था।

ईसाइयों का सबसे बड़ा झूठ तो इसके बाद शुरू होता है, जब वे कहते हैं कि जीसस मृत्यु के बाद तीन दिनों के अन्दर ही फिर जी उठे थे।
यह झूठी कहानी भी केवल इसलिये गढ़ी गयी ताकि जीसस को ईशपुत्र घोषित किया जा सके, जबकि बाइबल मे जैसा लिखा है, उससे तो लगता है कि यह कहानी पूर्ण-फर्जी है।
असल मे जीसस जब जीवित थे तो वे अपने चेलों को एक अन्य नबी 'योना' की कहानी बताते थे, जिस कहानी मे योना तीन दिन मछली के पेट मे रहने के बाद यहोवा की कृपा से पुनः बाहर आ जाते हैं। यह कहानी बाइबल के योना नामक अध्याय मे लिखी है!
इसी कहानी के आधार पर जीसस भी कहते थे कि यदि मै मर गया तो तीन दिन के भीतर ही पुनः कब्र से बाहर आ जाऊँगा। (मैथ्यू-12/39-40, चित्र-8)
जब पिलातुस ने जीसस को मौत की सजा सुनाई तब उसके कुछ सैनिकों ने पिलातुस से कहा कि हे महाराज! वह धूर्त (जीसस) कहता था कि मै तीन दिन के भीतर पुनः जीवित हो जाऊँगा, कहीं यह बात सत्य न हो जाये।
तब पिलातुस ने अपने सैनिकों से कहा था कि उसकी कब्र पर पहरा दो। अब यदि सैनिक कब्र पर पहरा दे रहे थे तो सब्त की अगली सुबह ही मरियम कैसे कब्र पर गयी और जीसस कैसे कब्र से बाहर आये?
यह कहानी भी बाइबल (मैथ्यू-27/62-66, चित्र-2) मे साफ लिखी है। मतलब जीसस के पुनः जीवित होने की कथा भी सरासर झूठ है।
वैसे जीसस को ईशपुत्र तो दूर एक महामानव कहना भी उचित नही होगा क्योंकि जीसस हमेशा खुद को श्रेष्ठ और दूसरों को तुच्छ समझते थे।
जीसस ने (जॉन-10/8, चित्र-3) मे कहा है कि मै ही सबसे अच्छा चरवाहा (मार्गदर्शक) हूँ। मुझसे पहले जितने (नबी) आये थे, वे सब चोर-डाकू थे।
साफ था कि जीसस खुद अपने ही पूर्वजों का भी सम्मान नही करते थे, वैसे भी मै बाइबल को घृणित बातों का एक गुच्छा मात्र ही समझता हूँ।
उदाहरण के लिये बाइबल के कुछ आदेश नीचे लिख रहा हूँ-
यहोवा आदेश देते हैं कि मनुष्य के मल पर भोजन बनाओ! (यहेजकेल-4/15, चित्र-4)
मूसा (Moses) कहते हैं कि जितनी भी स्त्रियों का विवाह हुआ है उन्हे मार डालो, और जो कुवाँरी हैं, उन्हे पकड़कर मौज-मस्ती करो। (गिनती-31/17-18, चित्र-5)
मूसा कहते हैं कि जो सब्त (यहूदियों का शनिवार और ईसाइयों का रविवार) के दिन काम करे, उसे जान से मार डालो! (निर्गमन-35-2, चित्र-6)
दरअसल यहूदी मान्यता के अनुसार यहोवा ने छः दिन (रविवार से शुक्रवार) मे पूरी दुनिया बनाई, और सातवे दिन (शनिवार) को आराम किया। प्रारम्भ मे ईसाई भी शनिवार को ही सब्त मानते थे, परन्तु बाद मे जीजस के पुनः जीवित होने वाले दिन (रविवार) को सब्त मान लिया, और इसीलिये ईसाई रविवार को छुट्टी रखते हैं।
यहोवा कहते हैं कि मै तुम पर तलवार चलवाऊँगा और तुम्हारे पूजा के स्थानों का नाश करूँगा, तुम्हारी वेदियाँ उजड़ेगी और सूर्य की मूर्तियां तोड़ दी जायेगी! (यहेजकेल-6/3-4, चित्र-7)

इसके अलावा बाइबल के एक और बड़े नबी याकूब (Jacob) एक महिला को बहला-फुसलाकर उससे दुष्कर्म करते हैं। (2- Samuel-11/2-25)
याकूब का बेटा भी अपनी ही सगी बहन का बालात्कार करता है। (2-Samuel-13/1-25)

अब जरा आप ही लोग विचार करो कि बाइबल कितनी ज्ञानवर्धक किताब है, और इसी प्रदूषित किताब को ईसाई मिशनरी वाले आदिवासी इलाकों मे जाकर बांटते हैं, तथा उन भोले-भाले अनपढ़ आदिवासियों को भरमाने के लिये 'चंगई सभा' (ईसाई मिशनरी वाले आदिवासी इलाके मे जाकर भूत-प्रेत और रोग निवारण के लिये झाड़-फूंक करते हैं, और बाद मे आदिवासियों को डराते हैं कि तुम ईसाई बनो नही बनोगे तो परमेश्वर नाराज होगा और तुम्हारा बेटा मर जायेगा, तुम्हारे पति का ऐक्सीडेंट हो जायेगा, आदि..) लगाकर उनका धर्म-परिवर्तन (आदिवासियों का कोई धर्म नही होता, वे अपने लोक-देवताओं जैसे-बूढ़ादेव, बड़ादेव, बुढ़ियामाई और बरमदेव को पूजते हैं, पर मिशनरी वाले उन्हे बहलाकर ईसाई बना देते हैं) करते हैं।

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#यहोवा_का_सनकपन

बाइबल के जितना पाखण्ड वाली किताब तो हिन्दुओं के पुराण भी नही हैं, असल मे बहुत कम हिन्दू है जो बाइबल पढ़ते है, अतः ये ईसाइयों की "पोपलीला" समझ ही नही पाते!
बाइबल मे ऐसी-ऐसी गप्प कहानियाँ लिखी है कि पढ़कर हॉलिवुड की फिल्में देखने का अनुभव होता है!
जैसे बाइबल निर्गमन-7/17-19 मे लिखा है कि मूसा (Moses) ने अपनी लाठी नील नदी मे डाल दी, और नदी का पूरा जल खून बन गया!
बाइबल निर्गमन-10/21 मे लिखा है की मूसा ने अपना हाथ ऊपर उठाया और पूरे मिश्र मे अंधेरा छा गया!

मै शुरू से ही कह रहा हूँ कि बाइबल एक झूठी किताब है और ईसाइयों का परमेश्वर 'यहोवा' सनकी स्वाभाव का था!

मै कुछ उदाहरण भी देता हूँ-
पहली बात तो यहोवा महिला विरोधी भी था, बाइबल लैव्यव्यवस्था-12/1-5 मे यहोवा ने फरमाया है कि यदि स्त्री पुत्र पैदा करती हैं तो वह 7 दिन पूर्ण अशुद्ध रहेगी, और 33 दिन शुद्ध होने मे लगेगा, लेकिन यदि महिला पुत्री पैदा करे तो 14 दिन अशुद्ध और 66 दिन शुद्ध होने मे लगेगा!

मै पूँछता हूँ.. क्यों भाई यहोवा! क्या लड़की पैदा करने की वजह से महिला अधिक अपवित्र हो जाती हो?

यही नही इस सनकी यहोवा ने लैव्यव्यवस्था-15/19-30 मे कहा है कि यदि स्त्री मासिकधर्म मे हो तो उसे कोई छूये तो छूने वाला पूरे दिन अशुद्ध रहेगा!
जो कोई उस बिछौने को छुये जिस पर वह बैठी हो, वो भी सांझ तक अशुद्ध रहेगा!
यहोवा का कहना है कि जब स्त्री का ऋतुकाल खत्म हो तो वो दो कबूतर के बच्चों को लेकर याजक के पास जाये और उनकी बलि चढ़वाकर यहोवा से अपने मासिक-धर्म की अशुद्धता का प्रायश्चित करे!
क्यो यहोवा जी! आपकी नजर मे मासिक-धर्म कोई पाप है जो स्त्री उसका प्रायश्चित है! और यदि पाप है तो आपने स्त्रियों मे क्यों माहवारी बनायी, आखिर कर्ता-धर्ता तो आप ही हो?

आगे यहोवा ने ईशनिन्दा का नियम भी बनाया है!
यहोवा ने बाइबल लैव्यव्यवस्था-24/16 मे कहा है कि- "जो कोई यहोवा की निन्दा करें, उसे निश्चित ही मार डाला जाये! सारी मंडली उस पर पथराव करे और उसे मार डाले"
यह ईशनिन्दा इस्लाम से पहले इस सनकी यहोवा ने ही चालू किया था और इसी के अनुसार मूसा ने शलोमीत के बेटे को पत्थर से मरवाया भी था, क्योंकि उसने भी यहोवा का अपमान किया था!
यही नही इतिहास मे बाइबल के खिलाफ बोलने के लिये गैलेलियो और कॉपरनिकस जैसे खगोलशास्त्रियों को कठोर दण्ड दिया जा चुका है!

दूसरी बात यहोवा दयालु भी नही था, यहोवा ने आगे (19-20) कहा है कि जो जैसा अपराध करे, उसके साथ भी वैसा ही किया जाये!
आँख के बदले आँख!
अंग-भंग के बदले अंग-भंग!
दाँत के बदले दाँत!
यहाँ सोचने वाली बात है कि कुरान भी इसी से प्रभावित है!
कुरान-2/178 मे लिखा है-
"ऐ ईमान वालो, तुम पर हत्या का किसास (बदला) लेना अनिवार्य किया जाता है। स्वतन्त्र व्यक्ति के बदले स्वतन्त्र व्यक्ति, दास के बदले दास, महिला के बदले महिला।"

अब जरा सोचो कि इन्ही तथाकथित यहोवा के स्वघोषित पुत्र यीशु ने New testament मे कहा है कि तुम अपने दुश्मनों को भी माफ कर दो!

बाप कह रहा है बदला लो, और बेटा बोल रहा था माफ कर दो!
शायद बाप की आज्ञा न मानने की वजह से ही बेटे के शरीर मे यहोवा ने होलसेल के भाव मे होल करवाकर क्रास पर लटकवा दिया था!

विश्वास करो, यीशु को मरवाने मे यहोवा का ही हाथ था! यहोवा ने लैव्यव्यवस्था-26/14-16 मे कहा है कि जो मेरी आज्ञा नही मानेगा, मै उसे बेचैन करूँगा!
उसे क्षयरोग और ज्वर से पीड़ित करूँगा!
उसकी आँखों को धुँधली कर दूँगा!

अब ईसा ने इनकी आज्ञा नही मानी थी, अतः उन्हे इस सनकी ने क्रास पर ही लटकवा दिया!

वैसे यहोवा ने अपने निन्दक को मार डालने का आदेश भले ही दिया है, फिर भी मै यहोवा की निन्दा करता हूँ, मै डंके की चोट पर कहता हूँ कि यहोवा सनकी और बेवकूफ था, और उससे भी अधिक बेवकूफ वो ईसाई हैं जो इस यहोवा को पूजते हैं! 
सच तो यह है कि यहोवा के अन्दर कोई भी ईश्वरीय-गुण नही था!

ईसाई धर्म वास्तव मे सबसे अधिक पाखण्डी धर्म हैं, पर चालाक ईसाइयों ने अपने पाखण्डों को आधुनिकता की चादर छुपा कर रखा हैं!

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मेरे पिछली पोस्ट मे बाइबल के दो महान नबी यहूदा और लूत की कथा थी, आज फिर मै बाइबल के ही दो और महापुरुष याकूब और स्वयं ईसाइयों के सर्वमान्य ईशपुत्र ईसामसीह पर बात करूँगा!

बाइबल मे एक विशिष्ठ नबी है याकूब... याकूब इब्राहीम के पुत्र इसहाक के बेटे थे!
इनका उल्लेख भी कुरान के 25 नबियों मे है, कुरान मे इन्हे याकूब और बाइबल मे जैकब (Jacob) कहा गया है!
याकूब का एक उपनाम 'इसराइल' भी था! इसराइल इब्रानी (हिब्रू) भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है "ईश्वर का प्रिय" और इन्ही याकूब के नाम पर इसराइल देश का नाम भी पड़ा है!

पादरियों के अनुसार याकूब बड़े दयालु और परमेश्वर को प्रिय थे, पर ये वास्तव मे कितने दयालु थे ऐ एक घटना से पता चलता है!

बाइबल उत्पत्ति-34/20-30 मे याकूब की कथा है! याकूब की एक बेटी थी जिसका नाम 'दीना' था! दीना से एक दूसरे नगर के सरदार का लड़का 'शकेम' प्रेम करता था!
शकेम ने याकूब से आकर कहा कि मै दीना से प्रेम करता हूँ, अतः आप मुझसे इसकी शादी कर दो, तथा हमारे नगर मे आकर सपरिवार रहो!
याकूब को लगा कि इसने मेरी पुत्री को अशुद्ध किया है, अतः याकूब ने कहा कि हम किसी ऐसे पुरुष से रिश्ता नही करते जिसका 'खतना' न हुआ हो। 
शकेम ने कहा कि मै अपने पूरे नगर का खतना करवा दूँगा, फिर आप लोग हमारे नगर की लड़कियो शादी कर लेना और हम लोग आपके नगर की लड़कियों से व्याह कर लेगें!
याकूब मान गये..., इसके बाद शकेम ने अपने पूरे नगर के पुरुषों का खतना करवा दिया, और याकूब पर विश्वास करके नगरद्वार भी खोलवा दिया!
फिर क्या था.... जब शकेम के नगर के लोग खतने के दर्द से तड़प रहे थे, तब याकूब ने अपने बेटों और साथियों के साथ तलवार लेकर उस नगर पर हमला  कर दिया तथा शकेम, उसके पिता और तमाम नगरवासियों को मार डाला! इसके बाद इन लोगों ने नगर की सारी औरतों का हरण कर लिया और भयंकर लूट-पाट की।

जरा सोचो कि जो व्यक्ति दर्द से तड़प रहे लोगों को तलवार से काट डाले, और महिलाओं को उठा ले जाये तथा लूटपाट करें ऐसा इंसान ईश्वर (यहोवा) का प्रिय था!

वास्तव मे तो ईसाइयों का भगवान 'यहोवा' भी महिला-द्रोही ही था, अन्यथा याकूब के इस कृत्य को कभी माफ न करता! यही नही यहोवा तो खुद भी महिलाओं का अपमान करता था!
बाइबल यशायाह-3/16-17 मे लिखा है कि- "यहोवा ने कहा है सिय्योन (येरूशलम) की स्त्रियां घमण्डी है, ये सिर ऊँचा किये तथा आँख मटकाती हुई चलती है, इसलिये यहोवा उनके सिर को गंजा करेगा और उन्हे नंगा करेगा"

सोचो! क्या ऐसा कोई सनकी भी भगवान हो सकता है जो स्त्रियों को गंजा और नंगा करे, पर यही सनकी यहोवा ईसाइयों का पूज्यनीय परमेश्वर है!

वैसे ईसाई सबसे अधिक जिस महापुरुष को मानते है वो हैं ईसामसीह (Jesus christ)...
ईसाई पूरा दिन आदिवासी ईलाके मे बाइबल लेकर प्रचार करते हैं कि यीशु दयालु थे, और अपने शत्रुओं को भी माफ कर देते थे!
अब जरा यीशु की दयालुता भी देख लों!
बाइबल (New testament) Mathew-10/34-35 मे लिखा हैं कि यीशु कहते हैं- " यह न समझो कि मै पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ, मै मिलाप कराने नही, पर तलवार चलवाने आया हूँ! मै तो आया हूँ कि मनुष्य को उसके पिता से, बेटी को उसकी माँ से और बहू को उसकी सास से अलग कर दूँ"

अब किसी ईसाई (Pastor) को बुलाकर पूँछो कि जो यीशु खुद कह रहें है कि मै तलवार चलवाने आया हूँ, वो 'दयासागर और क्षमाशील' कैसे हो गये?

वैसे यह बात केवल मैथ्यू ने ही नही, बल्कि ल्यूक (Luke-12/49-53) ने भी लिखी है!
ल्यूक लिखते हैं कि "यीशु कहते थे कि मै पृथ्वी पर आग लगाने आया हूँ, तुम क्या समझते हो कि मै पृथ्वी पर मिलन कराने आया हूँ, मै तो अलग कराने आया हूँ,"

ईसाई यीशु की झूठी-मूठी कहांनियाँ बनाकर लोगों को भ्रमित करते है, लेकिन अब इनकी भी पोल खोलना जरूरी हो गया है!


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अब जरा लूत की भी जीवनी सुने--
तौरात उत्पत्ति-19/12-37 मे लूत के बारे मे लिखा है कि लूत ने शराब पीकर अपनी दो सगी बेटियों से सम्भोग किया और बच्चे पैदा किये!

ईसाइयों का मानना है कि लूत ने यह कुकर्म शराब के नशे मे किया, तो आखिर उस समय लूत का परमेश्वर यहोवा कहा था?

खैर अब यहोवा के एक और नबी की बात करते हैं, इन महापुरुष का नाम यहूदा (Juda) है, और इन्ही यहूदा के नाम पर यहूदी (Jews) धर्म बना है!

यहूदा के तीन बेटे थे एर, ओनान और शेला! बड़े बेटे एर का विवाह 'तामार' नामक महिला से हुआ था, पर एर यहोवा के नियम नही मानता था, इसलिये यहोवा ने उसे मार दिया और तामार विधवा हो गयी!

फिर एक दिन यहूदा ने अपने दूसरे बेटे ओनान से कहा कि- 'तू अपनी भाभी तामार के पास जा और उससे सम्भोग करके संतान पैदा कर तथा अपना देवर धर्म निभा'
यहाँ यह सोचने वाली बात है कि हिन्दुओं मे अगर 'नियोग' होता था तो यहूदी भी करते थे, और यहूदा ने अपने बेटे ओनान को उसकी भाभी से नियोग करने के लिये ही भेजा था!

खैर ओनान ने अपने पिता यहूदा की बात नही मानी और भूमि पर ही अपना वीर्य गिराकर वापस आ गया! इससे परमेश्वर यहोवा फिर नाराज हो गये और उन्होने ओनान को भी मार दिया!

कुछ दिनों बाद यहूदा कि बहू तामार अपना मुँह ढ़ककर यहूदा के पास आयी, और यहूदा उसे पहचान न सका तथा उससे सहवास करके एक संतान पैदा कर दी!
यह पूरा वृतात्त बाइबल उत्पत्ति-38/1-29 मे लिखा है!

अब जरा सोचो कि यहूदा का बड़ा बेटा एर यहोवा के नियम नही मानता था इसलिये यहोवा ने उसे मार दिया!

मझला बेटा अपनी भाभी से कुकर्म नही किया इसलिये यहोवा ने उसे भी मार दिया, और जब अन्त मे खुद यहूदा अन्जाने मे तामार से मुँह काला कर रहे थे तब यहोवा ने यहूदा को नही बताया कि यह तुम्हारी ही बहू है!


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तौरात व्यवस्था विवरण-24:1-4 मे अल्लाह तलाक के बारें मे कहते हैं कि यदि पुरुष स्त्री को तलाक देना चाहे तो त्यागपत्र लिखकर उसके हाथ मे दे, और घर से निकाल दे!

दूसरी बात तौरात का कहना है कि अगर पुरुष ने महिला को तलाक दे दिया, और उस महिला ने किसी दूसरे पुरुष से शादी कर ली, तो वह महिला अशुद्ध हो गयी, 

 तौरात के इसी अध्याय के 27:20-22 मे लिखा है कि जो अपनी सौतेली माता, और सौतेली बहन से सम्बन्ध करे वह शॉपित है।

◆◆◆◆◆◆



ईश्वर वास्तव मे क्या है, क्या नही है, यह अभी भी खोज का विषय है!
अभी तक तो कोई भी पुख्ता प्रमाण से यह नही कह सकता कि ईश्वर है ही, क्योंकि प्रत्येक धर्म के ग्रंथो मे ईश्वर की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की गयी है!

वैसे मै पूरे विश्वास से यह कह सकता हूँ कि जो परम आस्तिक है, उन्हे कभी ईश्वर मिलेगा भी नही, क्योंकि उन्होने मन ही मन यह मान लिया है कि ईश्वर है, बस उनकी खोज वही समाप्त हो गयी! नास्तिकों ने ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकारा ही नही, अतः उनकी खोज अभी भी चालू है!

खैर हम जरा बाइबल के ईश्वर यहोवा के गुणों पर चर्चा करते हैं!
बाइबल के निर्गमन (20:4/5) मे परमेश्वर यहोवा अपने धर्म प्रचारक मूसा (Moses) को दस आज्ञाऐं देते है, जिनमे वे एक आज्ञा मे मूसा से कहते हैं कि-
"तू किसी मूर्ति को दण्डवत न करना, और न ही उसकी उपासना करना, क्योंकि मै तेरा परमेश्वर यहोवा जलन वाला परमेश्वर हूँ, और जो मुझसे बैर रखते हैं, मै उनके बेटों, पोतों और परपोतों को भी पितरों का दण्ड देता हूँ"

अब यह आज्ञा कितनी विचारणीय बात है कि यहाँ ईश्वर (यहोवा) खुद ही कह रहा है कि 'मै जलन वाला परमेश्वर हूँ' 
जरा सोचों कि जलन करने वाला भला ईश्वर कैसे हो सकता है!
जलन एक विकार है, और क्या ईश्वर के अन्दर विकार आ सकता है, अगर जिसके अन्दर विकार है, वह भला भगवान कैसे हो सकता है!
दूसरी बात यहोवा ने कहा कि मै पितरों का दण्ड बेटों, पोतों और परपोतों को भी देता हूँ!
यह भला ईश्वर कैसा न्याय है कि गलती दादा करे, और सजा पोता भुगते!
बाइबल भी निश्चित ही मादक पदार्थ खाकर लिखी गयी किताब है, और मै शुरू से कहता आया हूँ कि ईसाइयों का ईश्वर यहोवा 'सनकी प्रवृत्ति' का है!

अब पादरियों से यह सवाल पूँछना चाहिये कि आपका परमेश्वर जब खुद जलन करता है, तो वह किसी का कल्याण क्या करेगा? 
जलन उसी को होती है, जिसका मन साफ नही होता, और मलीन मन वाला कभी पूज्यनीय नही होता!

खैर बाइबल (निर्गमन-22:18) मे थोड़ा और आगे बढ़ते हैं तो यहोवा का सनकपन भी बाहर निकल आता है! यहोवा 'नैतिक और धार्मिक नियम' समझाते हुये कहते हैं कि- "तू जादू-टोना करने वाली को जीवित मत छोड़ना"

यूरोप मे अठारहवीं सदी तक Witch hunting नामक खूनी खेल होता था, जहाँ औरतों को Witch (चुडैल) बताकर जिन्दा जला दिया जाता था!
यह कृत्य सनकी यहोवा के इसी उपदेश का नतीजा था!
अगले आदेश मे यहोवा मुसलमानों के अल्लाह की तरह जिहादी फरमान देते हुये कहते हैं-
"जो कोई यहोवा को छोड़ किसी और देवता के लिये बलि करे, उसका सत्यानाश किया जाये"

अब यहोवा के इस आदेश पर क्या लिखा जायें, मै तो बाइबल पढ़कर स्तब्ध हूँ, और पढ़े-लिखे ईसाइयों की बुद्धि पर भी तरस आता है!

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गीत गोबिंद जयदेव।

यदि आप महाभारत और हरिवंशपुराण पढ़ो, तो आपको पता चलेगा कि कृष्ण बहुत सुन्दर होने के साथ-साथ अत्यन्त चतुर थे, वेद-शास्त्रों के ज्ञाता और बुद्धि...