यदि आप महाभारत और हरिवंशपुराण पढ़ो, तो आपको पता चलेगा कि कृष्ण बहुत सुन्दर होने के साथ-साथ अत्यन्त चतुर थे, वेद-शास्त्रों के ज्ञाता और बुद्धिमान थे, दुष्टों को दण्ड देते थे और संतों का संरक्षण भी करते थे।
परन्तु इतने सारे गुणों के बाद भी उनके कुछ भक्तों को लगता था कि कृष्ण के बखान मे अभी भी कहीं कुछ तो कमी है?
फिर उन्हे समझ आया कि वेदव्यास ने सब कुछ लिखा, पर यह तो लिखा ही नही कि कृष्ण एक जबरा मर्द थे, जो कामकला मे पारंगत थे और ऐसा सम्भोग करते थे कि महिलायें पानी-पानी हो जाती थी।
वेदव्यास द्वारा की गयी इसी कमी का आभास उड़ीसा के एक बड़े कृष्ण भक्त जयदेव को चौदहवीं सदी के आरम्भ मे ही हो गया, और उन्होने इसकी पूर्ति करने के लिये "गीत-गोविन्द" नाम की एक किताब लिखी।
भारत के दूसरे राज्यों मे इस किताब को कम ही लोग जानते हैं, पर उड़ीसा मे इसके महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुरी के जगन्नाथ धाम मे इसी के श्लोकों का पाठ होता है।
इस किताब का एक महत्व और भी है, राधा का वर्णन पहली बार इसी किताब मे किया गया है! उससे पहले महाभारत या हरिवंशपुराण मे राधा नाम के किसी भी पात्र का नामो-निशान तक नही है।
पण्डित जयदेव ने कृष्ण के पुरुषार्थ को साबित करने के लिये पहले राधा नाम का एक पात्र गढ़ा और फिर उसे कृष्ण प्रेमिका बताकर ऐसी गन्ध मचायी कि बाद मे ब्रह्मवैवर्तपुराण ने भी इसी कथा को काफी हद तक कॉपी कर लिया।
कहते हैं कि भक्त और मूर्ख मे अधिक फर्क नही होता! जयदेव भी ऐसे ही भक्त थे, जो कृष्ण को मर्द साबित करने के चक्कर मे ऐसी अश्लीलता परोस बैठे कि यह किताब एक पोर्नबुक से भी अधिक कामुक हो गयी।
चलिये इसी किताब से कुछ प्रसंग हम आपको बताते हैं! इसके अतिरिक्त कुछ तस्वीरें भी दे रहें हैं, ताकि स्वयं भी पढ़कर आनन्द ले लो।
जयदेव इस किताब के तीसरे अध्याय के श्लोक-5 मे लिखते हैं- "राधा ने कृष्ण के साथ अपने रतिभोग के बारे मे अपनी सखी को बताया कि हे सखी! जब कृष्ण मेरे साथ रतिभोग कर रहे थे, तब मेरे मुँह से सी-सी की आवाज निकल रही थी, और मेरा जूड़ा भी ढ़ीला होकर बिखर गया था!"
इसके अगले श्लोक मे राधा ने कहा कि रतिभोग के झटकों से मेरे घुघरूँ बज रहे थे, और मेरी करधनी भी ढ़ीली हो गयी थी।
आगे जयदेव अध्याय-12 श्लोक-3/4 मे लिखते हैं कि- "कृष्ण ने राधा के स्तनों पर पड़े कपड़े हटा दिये और राधा से कहा कि तुम अब कलश के सामान अपने स्तनों को मेरी छाती से चिपका दो, और रतिविलास का आनन्द लो।"
इसी अध्याय मे जयदेव आगे लिखते हैं कि "राधा ने लज्जावश अपने स्तनों को भुजाओं मे छिपा लिया था, श्रीकृष्ण ने राधा की भुजाओं को हटाकर उसके स्तनों को खूब मर्दन (मसला) किया। इसके बाद राधा की कमर पर थपकी दी और अधरों को जोर-जोर से चूसा, फिर अपना भार उसके ऊपर डाल दिया।"
जयदेव ने अपने भगवान की इस किताब मे इतनी खूबसूरती के साथ इज्जत उतारी है, जिसे मै अधिक लिख भी नही सकता।
खैर.. इच्छुक लोग अधिक जानने के लिये स्वयं पढ़े कि जयदेव ने किस तरह से राधा के स्तनों, अधरों और जंघाओं का इस किताब मे वर्णन किया है।
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