पूर्वांचल मे एक लोककथा कही जाती है-
कहते हैं कि एक बार एक दोनो पैरों से लंगड़ा इंसान नदी किनारे चिल्ला रहा था कि कोई धर्मात्मा मुझे नदी पार करवा दो!
एक महापुरुष आये और दयाभाव से वो उस लंगड़े को अपने कंधे पर उठाकर नदी पार कराने लगे, नदी मे पानी कमर तक ही था, पर जैसे ही वो धर्मात्मा बीच नदी मे पहुँचे, वैसे ही पानी ऊपर उठने लगा!
अब नदी का पानी उन महापुरुष के मुँह तक आ गया और वो डूबने लगे! फिर उन्होने भगवान से प्रार्थना करते हुये कहा कि- "हे प्रभु! मैने कभी कोई अपराध नही किया, और आज भी धर्मार्थ कार्य ही कर रहा हूँ, फिर मै क्यो डूब रहा हूँ"
अचानक सामने से आवाज आयी... "रे मूर्ख! तू क्या समझता है कि मै इस मानव को पैर नही दे सकता था, पर ये पूर्वजन्म का पापी था, अतः इसे दण्ड देने के लिये मैने लंगड़ा बनाया!
अब तुमने इसकी मदद करके मेरे विधान को चुनौती दी है, अब तू भी दण्ड भुगत, और इसके साथ ही डूब जा"
खैर ये कहानी थी, पर हमारे धर्मग्रंथ भी यह कहते हैं कि जो आज दिव्यांग है, वो पूर्वजन्म के पापी थे, और ईश्वर ने उन्हे दण्ड दिया है!
फिर आखिर किस आधार पर यही ईश्वरवादी ये कहते है कि लंगड़े-लूले अपंगो की मदद करो!
क्या ऐसा करके वो ईश्वर को नाराज नही कर रहे है?
क्या वो ईश्वर के दण्डविधान मे हस्तक्षेप नही कर रहे हैं?
आखिर अपराधी का साथ देने वाला अपराधी ही होता है, तो क्या ईश्वर इनसे रुष्ठ नही होगा?
मै एक नास्तिक हूँ, और ईश्वर तथा उसके विधान को ताख पर रखता हूँ... अतः हम अगर उसके नियम तोड़े तो लाजिमी है, पर आस्तिक क्यों ईश्वर के दण्डविधान का खुला मजाक उड़ाते हैं!
गरुणपुराण कहता है कि जो लोग आज जन्म से ही शारीरिक अपंग है, वो पूर्वजन्म मे महापापी थे, फिर धार्मिक इन पापियों से क्यों सहानुभूति रखते हैं!
गरुणपुराण अध्याय-5 श्लोक 1 से 57 तक मे तमाम पूर्वजन्म के पापियों का वर्णन है!
मै बताता हूँ कि पूर्वजन्म का पापी किस कमी के साथ जन्म लेता है!
ब्रह्महत्यारा क्षयरोगी होता है!
गौहत्यारा कुबड़ा!
कन्या हत्यारा कोढ़ी!
परस्त्री गमनकर्ता नपुंसक!
गुरूपत्नि व्यभिचारी चर्मरोगी!
गुरू का निन्दक मिरगी रोगी!
झूठी गवाही देने वाला गूँगा!
पक्षपात करने वाला काना!
पुस्तक चुराने वाला अन्धा!
ब्राह्मणों को पैर से मारने वाला लंगड़ा-लूला!
झूठ सुनने वाला बहरा!
आग लगाने वाला गंजा!
अन्न चुराने वाला चूहा!
धान चुराने वाला टिड्डी!
विष देने वाला बिच्छू!
सुगन्धित वस्तु चुराने वाला छछुन्दर!
मांस चुराने वाला गीध!
नमक चुराने वाला चींटी!
फल चोरी करने वाला बन्दर!
जूता चुराने वाला भेड़!
मार्ग मे यात्रियोंको लूटने वाला बकरा!
विषपान करने वाला काला नाग!
गायत्रीपाठ न करने वाला ब्राह्मण बगुला!
अयोग्य के घर यज्ञ कराने वाला ब्राह्मण सुअर!
बिना निमंत्रण भोजन करने वाला कौआ!
गर्भपात कराने वाला भिल्ल रोगी!
कम तौलने वाला उल्लू!
सास-ससुर का अपमान करने वाली स्त्री जोंक!
पति का अपमान करने वाली नारी जूँ!
परपुरुष से सम्बन्ध बनाने वाली नारी छिपकली!
स्त्रीलम्पट पुरुष घोड़ा होता है!
ब्राह्मण का धन लेना वाला ब्रह्मराक्षस!
अपने गोत्र की स्त्री से सेक्स करने वाला लकड़बग्घा!
शराब पीने वाला सियार!
इसके अतिरिक्त और भी कई पाप और पापयोनि लिखी है!
अब आप लोग जरा सोचों कि आपने इनमे से कौन सा पाप किये है, और आप अगले जन्म किस रूप मे पैदा होंगे!
मुझे यह पढ़कर भी आनन्द आया कि जितने सुअर है, ये सब पूर्वजन्म मे ब्राह्मण थे, और अयोग्य के घर यज्ञ करवा कर बेचारे सुअर बन गये!
इसलिये जितने भी धर्मात्मा हो, आप सब लूले-लंगड़ो की मदद मत करो, अन्यथा आप अन्जाने मे अपने ईश्वर को नाराज कर रहे हो!
#नोट- मेरे इस पोस्ट का आशय किसी दिव्यांग मित्र का मजाक बनाना नही है, मै जानता हूँ कि यह सब प्राकृतिक है, और उनके साथ मेरी पूरी सहानुभूति है...
मै केवल धार्मिकों और पंडो को ईश्वरी विधान बता रहा हूँ!
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