वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड सर्ग-128/106 मे लिखा हैं कि श्रीराम ने राजा बनने के बाद अपने भाइयों सहित अयोध्या मे 11 हजार साल तक राज्य किया....
यह बात तो ऐसी है कि जिसे सुनकर दांतो तले अगुँली दबा ले!
क्या कोई मनुष्य 11 हजार वर्ष तक जीवित रह सकता है?
क्या मनुष्यों की आयु कभी इतना होती थी?
वेदों के बाद मनुस्मृति ही सनातनियों की सबसे विश्वसनीय और मान्य धर्मग्रंथ है, अगर इसे प्राचीन संविधान कहें तो अतिशयोक्ति नही होगी!
मनुस्मृति की प्रशंसा देवगुरू वृहस्पति ने भी अपनी पुस्तक वृहस्पति स्मृति संस्कारखण्ड-13/14 मे किया है, उन्होने लिखा है--
"मनुस्मृति विरुद्धा या सा स्मृतिर्न प्रशस्यते।
वेदार्थोपनिबद्धत्वात् प्राधान्यं हि मनोः स्मृतेः।।"
अर्थात- जो स्मृति मनुस्मृति के विरुद्ध है, वह प्रशंसा के योग्य नहीं है। वेदार्थों के अनुसार वर्णन होने के कारण मनुस्मृति ही सब में प्रधान एवं प्रशंसनीय है।
यह तो मनुस्मृति का गुणगान हुआ, अब जरा देखो कि मनुस्मृति मे मनुष्यों की कितनी आयु बताई गयी है!
मनुस्मृति-1/83 मे मनु ने कहा है--
"आरोगाः सर्वसिध्दार्थाश्चतुर्वर्षशतायुषः।
कृते त्रेतादिषु ह्योषामायुर्ह्रसति पादशः।।"
अर्थात- कृतयुग (सतयुग) मे मनुष्य धर्माचरण पूर्वक सब मनोरथ सिद्ध करते हुये निरोग होकर चार सौ वर्ष पर्यन्त जीवित रहते हैं! त्रेता, द्वापर और कलियुग मे धर्म का लोप होने से क्रमशः सौ-सौ वर्ष आयु कम हो जाती है।
मनु ने इस श्लोक मे साफ बताया है कि त्रेतायुग मे मनुष्यों की आयु तीन सौ साल होती थी!
अब इसी त्रेतायुग मे राम थे, फिर भला राम 11 हजार साल कैसे जी गये?
इस पोस्ट पर मै किसी पर कोई आरोप नही लगाऊँगा, बस इतना ही कहूँगा कि वाल्मीकि और मनु मे से कोई एक तो झूठ बोल रहा है, और मेरी साधारण बुद्धि को वाल्मीकि ही झूठे नजर आ रहे हैं!
खैर फेंकना तो हमारे सनातनियों की आदत ही रही है!
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