Sunday, 28 March 2021

शिव कामुकता।

पिछले कुछ दिनों से इस बात पर बहस छिड़ी है कि क्या धर्मग्रंथों मे विज्ञान है?
भाजपा नेता डा० हर्षवर्धन और सत्यपाल सिंह ने तो यहाँ तक कह दिया कि वेद विज्ञान से भी बड़े है...

वैसे वेदों मे विज्ञान है या नही, ये तो बाद की बात है, पर भागवतपुराण मे विज्ञान जरूर है!

सोना-चाँदी की उत्पत्ति के बारे मे वैज्ञानिक बताते हैं कि करीब 20 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर धूमकेतुओं की वर्षा हुई थी, और उससे पिघले खनिज ही आज सोना और चाँदी के रूप मे मौजूद है!
पर वैज्ञानिक क्या जाने सच क्या है, सच तो हमारे धर्मग्रंथों मे लिखा है।

भागवतपुराण द्वितीयखण्ड मे सोना-चाँदी की उत्पत्ति के बारें मे पूरी कहानी बतायी गयी है--
एक बार शिवजी विष्णु से मिलने गये, और उन्होने विष्णु से निवेदन किया कि आप मुझे वही मोहिनी वाला रूप दिखा दो, जिसे देखकर असुरों ने आपको अमृत का घड़ा दे दिया था!
विष्णु ने कहा कि उचित समय पर आपको वह रूप जरूर दिखा दूँगा!

कुछ समय बाद एक दिन शिवजी पार्वती के साथ कहीं जा रहे थे, अचानक उन्होने एक सुन्दर स्त्री को देखा! वह स्त्री एक गेंद को उछालकर खेल रही थी, और जब वह गेंद को ऊपर उछालती तो उसके स्तन जालीदार कपड़ों से बाहर झांकने लगते थे... 
उसे देखते ही शिवजी मदहोश और कामातुर हो गये, शिवजी ने इतनी सुन्दर स्त्री कभी नही देखी थी! वह स्त्री कोई और नही, बल्कि मोहिनी रूप मे विष्णु ही थे।

शिवजी मोहिनी को पकड़ने के लिये उसकी तरफ दौड़े, वे कामपिपासा से इस तरह व्यग्र थे कि यह भी भूल गये कि उनके साथ पार्वती भी है!

शिवजी को अपनी तरफ आता देखकर मोहिनी भी उनसे दूर जाने लगी...
अब तो शिवजी अपना त्रिशूल फेंककर उसकी तरफ ऐसे झपटे जैसा किसी गाय के पीछे मतवाला सांड़ भागता हो!

मोहिनी रूपधारी विष्णु भी समझ गये कि मैने 'मोहिनी' बनकर आफत मोल ले लिया है, अब अगर इस भंगेड़ी के हाथ लग गये तो मेरी सजी-सजाई हवेली खण्डहर बन जायेगी...
फिर क्या था, अपनी जान बचाकर मोहिनी भी भागी!
शिवजी मोहिनी के अद्भुत सौन्दर्य को देखकर कामाग्नि मे जल रहे थे, उन्होने मोहिनी को पूरी ताकत झोककर खदेड़ लिया कि 'कहाँ तक भागकर जाओगी छम्मक-छल्लो'

शिवजी किसी कामुक घोड़े की तरह मोहिनी को पकड़ने के लिये दौड़ रहे थे, वे इतने कामातुर हो गये थे कि यूँ समझ लो कि भुसावली केला छिलके के बाहर आ गया, और शिवजी का वीर्य टपकने लगा...

शिवजी का वीर्य जहाँ-जहाँ टपका, वहाँ सोने की खादाने हुई, अर्थात भागवतपुराण के अनुसार सोना और चाँदी शिवजी के वीर्य से बने हैं! अतः ऐसे ही सोना-चाँदी की उत्पत्ति हुई.....

वैसे शिवजी के बारह ज्योतिर्लिंगों की पूजा हम भारतीय करते है, और ये वीर्य टपकाने दक्षिण अफ्रीका चले गये!
भला ये कैसा न्याय हुआ महादेव।

और जो लोग कहते हैं कि धर्म मे विज्ञान नही है, वो जान लें कि हमारे धर्मग्रंथों मे करोड़ो साल पहले ही यह वैज्ञानिकी बातें लिखी थी!

वैसे इस कथा से जुड़ी कुछ लोककथाऐं भी है, केरल के हिन्दुओं का मानना है कि मोहिनी ने शिव के एक पुत्र को जन्म दिया था, जिसका नाम "अयप्पा" था!
केरल के हिन्दू सबसे अधिक अयप्पा की ही पूजा करते है, और वहाँ अयप्पा के कई मन्दिर हैं...
जबकि भागवतपुराण की माने तो मोहिनी शिव के हाथ से निकलकर भाग गयी थी!
इस कथा को लिखने से मेरा अभिप्राय शिव का अपमान करना नही है, पर जरा खुद विचार करो कि इस कथा के माध्यम से भागवतपुराण ने शिवजी पर 'Attempt to rape' का दोष तो लगा ही दिया है।

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