पुराण लिखने वालों की सबसे बड़ी करतूत यह थी कि उन्हे जिस महापुरुष के माता-पिता का नाम नही पता होता था वो उसे ऐसी-ऐसी जगह से पैदा कर देते थे कि पढ़ने वाला भी बेहोश हो जाये!
कई बार ऐसा होता है कि सभी महामानवों के माँ-बाप का नाम ज्ञात नही होता, जैसे कि अभी भी कबीर और साँईबाबा के माता-पिता का नाम ज्ञात नही है....
ठीक ऐसे ही पुरातनकाल मे ब्रह्मा, विष्णु और शिव के माँ-बाप का नाम पता नही था!
पुराणों के लेखकों ने इस समस्या का भी हल निकाल लिया, और इन देवताओं को जहाँ-तहाँ से पैदा करवाना शुरू कर दिया!
जैसे शिवपुराण के अनुसार शिव एक बार अपने टखने पर अमृत मल रहे थे, तभी वहीं से विष्णु पैदा हो गये!
पद्मपुराण और विष्णुपुराण के अनुसार विष्णु के ललाट से शिव का जन्म हुआ, और इसी पुराण के अनुसार विष्णु की नाभि से कमल निकला तथा उसी कमल से ब्रह्मा पैदा हुये!
देवी पुराण के अनुसार इन तीनों को ही आदिशक्ति देवी ने पैदा किया।
अब नयी जानकारी मिली है कूर्मपुराण से..
कूर्मपुराण-10/22के अनुसार-
"तदा प्राणमयो रुद्रः प्रादुरासीत् प्रभोर्मुखात् ।
सहस्त्रादित्यसंकाशो युगान्तदहनोपमः।।"
अर्थात- प्रभु (विष्णु) के मुख से हजारों सूर्य के समान प्रलयकारी शिव पैदा हुये।
आगे 23वें श्लोक मे लिखा है कि पैदा होते ही जोर-जोर से रोने के कारण उनका नाम 'रुद्र' पड़ा!
अब सोचो इतनी बड़ी अवैज्ञानिक बात...
मतलब हद है यार.... ग्रंथ के नाम पर कुछ भी चिपका देते थे!
अरे भाई, विष्णु जी के मुँह मे कौन सी बच्चेदानी थी जो वहाँ से कोई पैदा होगा?
ये तो ऐसा लिखते थे, कि चमत्कार भी एक बार शर्म से लाल हो जाये!
अभी यही शान्ति नही मिली थी, इसी पुराण इसी 10/20 मे लिखा है-
"क्रोधाविष्टस्य नेत्राभ्यां प्रापतन्नश्रुबिन्दवः।
ततस्तेभ्योऽश्रुबिन्दुभ्यो भूताः प्रेतास्तथाभवन् ।।"
अर्थात- क्रोध के कारण ब्रह्माजी की आँखों से आंसू की बूँद गिरी, और उस आंसुओं से सब भूत-प्रेत पैदा हो गये, तथा उन्हे देखकर क्रोध और शोक से ब्रह्माजी ने अपने प्राण त्याग दिये!
अब लो... यहाँ ब्रह्मा ने आसुओं से भूत-प्रेत पैदा कर दिये, और शर्म से ब्रह्मा मर भी गये!
फिर दूसरे ब्रह्मा कहाँ से आये भाई?
अब सोचो कि कैसे-कैसे विद्वान थे, पूर्वकाल मे?
क्या कभी सोचा है कि शिव और विष्णु एक ही काल मे थे?
शिव के बारें मे शोध करने वालों का मानना था कि शिव और विष्णु समकालीन नही थे! शिव विष्णु से काफी प्राचीन थे, सोचो कि जिस दौर मे विष्णु रेशमी वस्त्र पहनते थे, उसी दौर मे शिव बाघ की खाल पहनते थे!
शोधकर्ताओं का मानना है कि शिव का निवास स्थान भूटान के आस-पास था, तब ये क्षेत्र हिमालय की तराइयों मे फैला था और भूटान का प्राचीन नाम भूतान या भूतस्थान था, और वहाँ के जनजातियों के मुखिया होने की वजह से शिव को "भूतनाथ" भी कहा जाता था!
शिव किराट जाति से सम्बन्ध रखते थे, जो आज अनुसूचित जनजाति (ST) मे आती है!
यह सभी को पता है कि शिव अनार्य देवता थे, पर बाद मे आर्यों ने उन्हे भी देवता मान लिया!
सच है कि पुराणों मे ऐसे-ऐसे पाखण्ड लिखे हैं जो हिन्दू-समाज को शर्मसार कर दे, पर पता नही क्यों हिन्दू इन पुराणों का विरोध करने के बजाये इनका समर्थन करते हैं!
वैसे अब मुझे भी पुराण पढ़ना बन्द करना पड़ेगा, नही तो मै भी आगरा पागलखाने मे पहुँच जाऊँगा!
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मेरे इस पोस्ट का उद्देश्य किसी पर जातिगत कटाक्ष करना नही है, पर पुराणों मे जो लिखा है, मै उसे बताना भी अपना कर्तव्य समझता हूँ।
आमतौर पर सब लोग पुराण पढ़ते नही हैं, अतः ऐसी कई बातें जनमानस को पता ही नही होती, जो उनके लिये पुराणों मे लिखी गयी है।
ऐसी ही एक कहानी विष्णुपुराण, पाँचवां अंश, अध्याय-298 मे लिखी है-
......यह उस समय की कथा है जब ऋषियों के श्राप से यदुवंश का नाश हो चुका था, और श्रीकृष्ण की समस्त पत्नियों को अर्जुन द्वारिका से हस्तिनापुर लेकर जा रहे थे। जब अर्जुन कृष्ण की पत्नियों को लेकर हस्तिनापुर जा रहे थे, तभी रास्ते मे लुटेरों ने अर्जुन को हराकर कृष्ण की पत्नियों का हरण कर लिया था।
वैसे उक्त कथा तो लगभग सभी लोग जानते ही होंगे, पर बहुत कम लोग जानते होंगे कि श्रीकृष्ण की सुन्दर पत्नियों का हरण करने वाले वे लुटेरे कौन थे?
.....विष्णुपुराण के अनुसार वे लुटेरे आभीर (वर्तमान समय के अहीर) थे।
बहुत से यादव सरनेम वाले मित्र कहते हैं कि यादव और अहीर एक ही हैं, जबकि मै इसका कई बार खण्डन कर चुका हूँ... विष्णुपुराण मे भी वही लिखा है। विष्णुपुराण के अनुसार यादव चन्द्रवंशीय क्षत्रिय थे, जिनका विनाश दुर्वासा और गांधारी के श्राप की वजह से द्वापर मे ही हो गया था। पर अहीर वे लोग हैं, जिन्होने कृष्ण की पत्नियों का हरण किया, और बाद मे उन्ही से संतानोत्पत्ति की।
विष्णुपुराण मे अहीरों को दस्यु और नीच लिखा गया है। विष्णुपुराण मे लिखा है कि नीच अहीरों ने अर्जुन को हराकर कृष्ण की पत्नियों का हरण कर लिया।
अब सोचनीय बात यह है कि श्रीकृष्ण के वंशजों को विष्णुपुराण मे नीच तो नही लिखा जायेगा।
वैसे इस पोस्ट को अधिक समझने के लिये पोस्ट के साथ संलिग्न की गयी तस्वीरें पढ़े, और खुद का दिमाग लगायें।
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