आप लोग यह तो जानते हो कि पाण्डु की पत्नि कुंती को संतान पैदा करने के लिये नियोग करना पड़ा था!
पाँचो पांडव पाँच अलग-अलग पिता की संतान थे........
युधिष्ठिर यमराज के पुत्र थे!
भीम पवनदेव के पुत्र थे!
अर्जुन इन्द्र के पुत्र थे, तथा नकुल और सहदेव दोनो अश्विनी कुमारों के पुत्र थे!
पर क्या आपको ये पता है कि अपने पति पाण्डु के जीते जी कुंती ने दूसरे पुरुषो से नियोग क्यो करना पड़ा?
मै बताता हूँ......
महाभारत काल मे एक ऋषि थे जिनका नाम किंदम था! एक बार राजा पाण्डु अपनी दोनो पत्नियों कुंती और माद्री के साथ वन मे समय व्यतीत करने गये थे, तब वो ऋषि किंदम के आश्रम के पास ही ठहरे थे!
हमारे ऋषि-मुनि कितने रंगीन मिजाज थे जरा देखो तो सही.....
किंदम ऋषि को ना जाने क्या चुल्ल मची थी कि वो अपनी पत्नि को हिरनी बना दिये और खुद हिरण बनकर एक झाड़ी मे सम्भोग कर रहे थे! उसी समय पाण्डु शिकार खेलने निकले, उन्होने सोचा कि हिरण और हिरनी का जोड़ा है.... वो नही जानते थे कि ये किंदम ऋषि है!
पाण्डु ने तीर मार दिया..... बाण लगते ही किंदम ऋषि मनुष्य वेष मे आकर दर्द से कराहने लगे!
बेचारे पाण्डु ने पास जाकर क्षमायाचना की... और कहा कि मै नही जानता था कि आप हो, मैने सोचा सचमुच का हिरन है!
किंदम ऋषि ने एक नही सुनी और पाण्डु को श्राप दिया कि तुमने मुझे सम्भोग करते समय मारा है, अब जब तुम भी अपनी पत्नि से सहवास करोगे तभी तुम्हारी मृत्यु हो जायेगी....
दुःखी पाण्डु ने यह बात कुंती को बतायी..... और कहा कि अब हमारा वंश कैसे आगे बढ़ेगा, इसी वंश को बढ़ाने के लिये ही कुंती ने नियोग किया था!
परन्तु यह बात माद्री को पता नही थी, और उसने एक दिन पाण्डु को मैथुन के लिये विवश किया... जिससे पाण्डु की मृत्यु हो गयी।
इस कहानी के बाद दो सवाल उठते है.......
पहला जब कुंती का कोई भी पुत्र पाण्डु ने पैदा नही किया था तो वो पाण्डव क्यो कहलाये!
दूसरा किंदम ऋषि जब हिरण के वेष मे मैथुन कर रहे थे तो अगर उसी समय उन पर शेर हमला करके मार देता तो वो क्या करते...
जब पाण्डु मनुष्य होकर उन्हे नही पहचान पाये तो जंगल का शेर भला क्या पहचान पाता.........
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